Sunday, April 8, 2012

हमको किसके ग़म ने मारा, ये कहानी फिर सही...

I have been too busy for the last many days to write anything fresh... specially after coming back from Mumbai.
Today I was going through some old stuff in my diary, when I came across this poetry, which I had written some fifteen years back for an annual function of our community. For some reasons, poetry recital was cancelled.
But I would like to share it with my friends here....in the hope that you would like it.
I don't have any knowledge of chhandas (छंद) , so one can call it just tukbandi.
Any suggestions are welcome...

आत्मा एक मनुष्य की ले चले यमराज,
बैठे जहाँ चित्रगुप्त थे लेकर अपने साज;
देखकर मृतात्मा चित्रगुप्तजी पहले तो झुँझलाये,
फिर अलसाये, चाय की चुसकी लेकर चपरासी पर चिल्लाये,
बैठे रहते हो दिनभ्रर, कुछ काम नहीं हो करते,
रो्ज्ञ नई मांगे लाते हो, स्ट्राइक से नहीं डरते.
मुँह क्या तकते हो मेरा तुम, लेजर इसका लाओ,
पाप-पुन्य का हिसाब है करना, जल्दी से तुम जाओ.
चपरासी लेजर ले आया, चित्रगुप्त ने चश्मा लगाया;
मृतात्मा का खाता जो देखा, उनको कुछ समज न आया.
झाँकके अपनी ऐनक से देखा, उपर से नीचे तक देखा;
मस्तक पर उभरी एक रेखा, पाप-पुन्य का किया जो लेखा
कहने लगे क्या कहुँ मैं ईसकी, बात नहीं कोइ कहने जैसी;
पाप-पुन्य कुछ नहीं खाते में, बेलेंस निल है बही खाते में !
बात सुनी जब गहरी सोच में डूब गये यमराज,
कहने लगे, क्या यह संभव है जीवन में महाराज ?
क्या ये को संत है, पीर, फकीर या ग्यानी ?
नहीं, कहा चित्रगुप्त ने; यह है हिन्दुस्तानी !
पाप-पुन्य की फिक्र ये करता, जो होता फोरटी-नाइन में, (१९४९)
जीवन तो सारा कट गया इसका, राशन की लाइन में;
आलु-प्याज्ञ के चक्कर में ये फिरा है मारा मारा;
नोन-तेल के चक्कर में ये जीवन से है हारा.
तुम ही कहो कहाँ भेजें इसको, स्वर्ग या कि नर्क ?
समज नहीं पाया ये अब तक, इन दोनो में फर्क !
स्वर्ग-नर्क की बातें छोडो, कहने लगे यमराज;
ये लायक है उसी देश के, जहाँ भ्रष्टाचार का राज.
सितम सहना और कुछ भी न कहना, बनी जहाँ की पहचान
भारत वाली क्यु में लगा दो इस को भी भगवान !
source : unknown
In Faking News - http://my.fakingnews.firstpost.com/hindi/humko-kiske-gam-ne-mara-3833

4 comments:

Kishore said...

I didn't know u even wrote poetry and satire..it's a good one.keep it coming n don't stifle your talent.at least you have one kadrdan in me.

debajyoti said...

very nicely written. check ur diary and see if u have some more. would love to read them.

Meena said...

wah kya baat hai. this is awesome. i know u dont get time but do keep posting as and when u get chance

V. Khawani said...

Thanks everyone for your valuable comments :)

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